अमरूद : फसल-संरक्षण
अमरूद (सिडियम ग्वाजवा) : अमरूद फैलने वाली शाखाओं वाले छोटे पेड़ों पर लगते हैं और पेड़ 6 मीटर ऊँचाई एवं 9 मीटर फैलाव तक बढ़ते हैं। इसमें सफ़ेद 1-इंच के फूल लगते हैं, जो बाद में छोटे गोलाकार, अण्डाकार या नाशपाती के आकार वाले फल देते हैं। अमरूद का गूदा नरम होता हैं, जो इ किस्मों के आधार पर सफ़ेद, गुलाबी या लाल होता है। इसका छिलका भी खाया जा सकता है। अमरूद में वर्ष भर फल लगते हैं। यह उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में अच्छी तरह उग आता है, फिर भी यह अन्य कई उष्णकटिबंधीय फसलों की अपेक्षा सूखे को सह सकता है। यह कई प्रकार की मिट्टियों के लिए अनुकूल है और छिछली, अनुर्वर मिट्टियों में भी अच्छी तरह उग आता है। इसके कच्चे फल हरे होते हैं, लेकिन कुछ प्रजातियाँ पकने पर भी हरी ही रहती हैं और कुछ पीली होती हैं।
निदानकारी उपाय
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रोग-प्रबंधन: झुलसा, एंथ्रेक्नोज़, शीर्ष-क्षय, कैंकर, फल-सड़न, शुष्क-सड़ाँध, वर्तिकाग्र-सड़न और पौध-अंगमारी अमरूद पर लगने वाली प्रमुख बीमारियाँ हैं।
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कीट-प्रबंधन : फल-मक्खी, हरा शल्क कीट, मिरिड कीट, चूर्णी कीट, छिलका खानेवाली इल्ली और चाय मच्छर कीट अमरुद को प्रकोपित करने वाले प्रमुख कीट हैं।